खून में डूबी सियासत नहीं देखी जाती
हमसे अब देश की हालत नहीं देखी जाती,
उनके चेहरों से उठाना ही पड़ेगा पर्दा
जिन शरीफ़ो से शराफ़त नहीं देखी जाती,
ऐसा लगता है पलट आया है दौर ए यूसुफ़
भाई से भाई की सूरत नहीं देखी जाती,
हमको तलवार उठाना ही पड़ेगा शायद
बेगुनाहों की शहादत नहीं देखी जाती,
पी लिया जिसने भी दरिया ए वफ़ा का पानी
उस क़बीले में अदावत नहीं देखी जाती,
हम तो बेताब फ़िदा होते है किरदारों पर
दिल के बाज़ारों में दौलत नहीं देखी जाती..!!
~बेताब हल्लौरी
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