घुटन भी देख रही है मुझे हैरानी से
कहीं मैं ऊब ही जाऊँ न उस जवानी से,
सज़ा ए मौत नहीं उम्रक़ैद काटोगे
ये हुक्म आ ही गया दिल की राजधानी से,
ज़रा सा इश्क़ किया और अब ये हालत है
वो बह रहा है रगों में अजब रवानी से,
उदासियों में भी शिकवा भला करें किस से
बचा है कौन मोहब्बत में राएगानी से,
कभी कभी तो मुझे ख़ुद पे हँसी आती है
मुझे ये इश्क़ हुआ भी तो एक दिवानी से,
मैं कोशिशों में हूँ एक जिस्म को बनाने की
हवा से आग से मिट्टी से और पानी से,
उदास हो चुका किरदार चीख़ कर बोला
मुझे निकाल दो अब इस दुखी कहानी से..!!
~अमित शर्मा मीत