क़र्ज़ जाँ का उतारने के लिए मैं जीया ख़ुद को मारने के लिए…

karz jaan ka utarne ke liye

क़र्ज़  जाँ का उतारने के लिए मैं जीया ख़ुद को मारने के लिए,   मुझे जलना पड़ा दीये

ये ज़र्द पत्तों की बारिश मेरा ज़वाल नहीं…

sabz mausam me zard hawa dee usne

ये ज़र्द पत्तों की बारिश मेरा ज़वाल नहीं मेरे बदन पे किसी दूसरे की शाल नहीं, उदास हो

वही ताज है वही तख़्त है वही ज़हर है वही जाम है…

wahi taaz hai wahi takht hai wahi zahar hai

वही ताज है वही तख़्त है वही ज़हर है वही जाम है ये वही ख़ुदा की ज़मीन है

थी जिसकी जुस्तज़ू वो हकीक़त नहीं मिली…

thi jiski justzoo wo haqiqat nahi mili

थी जिसकी जुस्तज़ू वो हकीक़त नहीं मिली इन बस्तियों में हमको रफ़ाक़त नहीं मिली, अबतक हूँ इस गुमाँ

अब जो बिछडे हैं, तो बिछडने की शिकायत कैसी…

ab jo bichhde hai to bichhadne ki shikayat kaisi

अब जो बिछडे हैं, तो बिछडने की शिकायत कैसी मौत के दरिया में उतरे तो जीने की इजाजत

कौन कहता है शरारत से तुम्हे देखते है…

kaun kahta hai sharart se tumhe dekhte hai

कौन कहता है शरारत से तुम्हे देखते है जान ए मन हम तो मुहब्बत से तुम्हे देखते है,

तू समझता है कि रिश्तों की दुहाई देंगे…

tu samjhta hai ki ham rishto ki duhaai denge

तू समझता है कि रिश्तों की दुहाई देंगे हम तो वो हैं तेरे चेहरे से दिखाई देंगे, हम

तहरीर से वर्ना मेरी क्या हो नहीं सकता…

tahrir se warna meri kya ho nahi sakta

तहरीर से वर्ना मेरी क्या हो नहीं सकता एक तू है जो लफ़्ज़ों में अदा हो नहीं सकता,

जो पत्थरो में जुबां ढूँढे हम वो चीज है दोस्त…

jo pattharo me zuban dhoondhe ham wo chij hai dost

जो पत्थरो में जुबां ढूँढे हम वो चीज है दोस्त है मर्ज़ ख़्वाब सजाना तो हम मरीज़ है

दोस्तों से रसाई सोचेंगे सबसे हो आशनाई सोचेंगे…

dosto se rasaai sochenge

दोस्तों से रसाई सोचेंगे सबसे हो आशनाई सोचेंगे, सोचती चाहे जो रहे दुनियाँ हम तो सबकी भलाई सोचेंगे,