रखा न अब कहीं का दिल ए बेक़रार ने

rakha na ab kahin ka dil e beqarar ne

रखा न अब कहीं का दिल ए बेक़रार ने बर्बाद कर दिया ग़म ए बे इख़्तियार ने, दिल

तमन्ना दो दिलों की एक ही मालूम होती है

तमन्ना दो दिलों की

तमन्ना दो दिलों की एक ही मालूम होती है अब उनकी हर ख़ुशी अपनी ख़ुशी मालूम होती है,

तर्क ए ग़म गवारा है और न ग़म का यारा है

तर्क ए ग़म गवारा

तर्क ए ग़म गवारा है और न ग़म का यारा है अब तो दिल की हर धड़कन आ’लम

रंगों की आड़ में खुनी खेल, ये इंसानियत क्या जाने ?

rango ki aad me khooni khel

रंगों की आड़ में खुनी खेल, ये इंसानियत क्या जाने ? हरा, भगवा में डूबे हुए केसरिया का

इश्क़ कर के मुक़र गई होगी…

इश्क कर के मुकर

इश्क़ कर के मुक़र गई होगी वो तो लड़की है डर गई होगी, आदतें सब ख़राब कर के

बाद मरने के मेरे किसी केलब पे तो मेरा नाम होगा

baad marne ke mere kisi ke

बाद मरने के मेरे किसी केलब पे तो मेरा नाम होगा मातम होगा कहीं, कहीं शहनाइयों का एहतिमाम

आग बहते हुए पानी में लगाने आई

आग बहते हुए पानी

आग बहते हुए पानी में लगाने आई तेरे ख़त आज मैं दरिया में बहाने आई, फिर तेरी याद

होना नहीं अब उसने मेहरबान छोड़ दे

hona nahi ab usne mehrban

होना नहीं अब उसने मेहरबान छोड़ दे उसके लिए तू चाहे ये जहान छोड़ दे, कितनी उठाए हमने

वो जो दिल के क़रीब होते है…

pyas jo umr bhar naa bujhi purani hogi

वो जो दिल के क़रीब होते है लोग वो भी अज़ीब होते है, पढ़ना लिखना जो जानते न

हम वक़्त ए मौत को तो हरगिज़ टाल न पाएँगे

waqt e maut ko hargiz taal naa payenge

हम वक़्त ए मौत को तो हरगिज़ टाल न पाएँगे हम ख़ाली हाथ आए है और ख़ाली हाथ