होना नहीं अब उसने मेहरबान छोड़ दे

होना नहीं अब उसने मेहरबान छोड़ दे
उसके लिए तू चाहे ये जहान छोड़ दे,

कितनी उठाए हमने मशक्त तेरे लिए
कितने अकेले झेले थे तूफान छोड़ दे,

हम सा भी कोई मुफ़लिस ओ नादार न होगा
जिसको कोई भी इश्क़ के दौरान छोड़ दे,

तुम इतने दिल फ़रेब नहीं इत्तिफ़ाक से
कि कोई तुमको देख कर ईमान छोड़ दे,

तुमसे न चल सकेगा मुहब्बत का कारोबार
ऐ दोस्त ! किराये की है दुकान छोड़ दे,

क्यूँ सिगरेटो से जी को जलाते हो आजतक
इसमें सेहत का है तेरी नुक़सान छोड़ दे,

गर देखनी हो हिज़्र में जाँ बाज़ियाँ मेरी
मेरे लिए तू खुला आसमान छोड़ दे,

मेरी रज़ा से आज अलग मुझसे हो गया
फिर उसकी तलब ऐ दिल ए नादान छोड़ दे,

जिसकी मता ए ज़ीस्त फक़त तेरी ज़ात हो
क्या उसको यूँ नहीं है सरोसामान छोड़ दे ?

हम तेरा इंतज़ार भी कर लेंगे उम्र भर
हम वो नहीं जो बीच में मैदान छोड़ दे,

मैं इतनी शिद्दतों से तुझे याद आऊँगा
मुमकिन है कि तू सब्र का दामन छोड़ दे,

मेरी गज़ल पे डालना बस सरसरी नज़र
इसके पश ए पर्दा है क्या उन्वान छोड़ दे,

उसको भुलाने के लिए उस महज़बीं ने
किस दर्ज़ा भारी माँगा है तावान छोड़ दे,

जा तुझको मुबारक़ हो जहाँ भर की रौनके
जा छोड़ दे मेरा दिल ए वीरान छोड़ दे,

मुझको सुकूं के साथ में रहने दे चंद रोज़
ऐ इश्क़ ! तू ख़ुदारा मेरी अब जान छोड़ दे,

वो शख्स जो कि क़िस्सा ए पारीना हो गया
उसकी तलाश ऐ नवाब नादान छोड़ दे..!!

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