हमने कैसे यहाँ गुज़ारी है….

hamne kaise yahan guzari hai

हमने कैसे यहाँ गुज़ारी है अश्क खुनी है आह ज़ारी है, हम ही पागल थे जान दे बैठे

याद आता है मुझे छोड़ के जाने वाला

yaad aata hai mujhe chhod ke jaane wala

याद आता है मुझे छोड़ के जाने वाला मेरी हर शाम को रंगीन बनाने वाला, आज रो कर

मैंने माना कि तुम ज़ालिम नहीं हो मगर

मैंने माना कि तुम

मैंने माना कि तुम ज़ालिम नहीं हो मगर क्या मालूम था कि हम तुमसे डर जाएँगे, तेरी याद

बात करते है यहाँ क़तरे भी समन्दर की तरह

baat karte hai yahan qatre bhi samndar ki tarah

बात करते है यहाँ क़तरे भी समन्दर की तरह अब लोग ईमान बदलते है कैलेंडर की तरह, कोई

क्यूँ रवा रखते हो मुझसे सर्द मेहरी बे सबब

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क्यूँ रवा रखते हो मुझसे सर्द मेहरी बे सबब बीच में लाना पड़े थाना कचहरी बे सबब, मैंने

दुनियाँ में करने पड़ते है इतने समझौते

दुनियाँ में करने पड़ते

दुनियाँ में करने पड़ते है इतने समझौते कि मौत से पहले कई बार मर जाते है हम, ज़िन्दगी

बस इतनी बात पे बीबी खफ़ा है शौहर से

bas itni si baat pe bibi khafa hai shauhar se

बस इतनी बात पे बीबी खफ़ा है शौहर से कि माँ के हाथ पे ला कर दिहाड़ी रखता

राब्ता ज़िस्म का जब रूह से कट जाता है

राब्ता ज़िस्म का जब

राब्ता ज़िस्म का जब रूह से कट जाता है आदमी मुख्तलिफ़ हालात में बँट जाता है, देख कर

उम्र कहते है जिसे साँसों की एक जंज़ीर है

halaat the kharab yaa main kharab tha

उम्र कहते है जिसे साँसों की एक जंज़ीर है चश्म ए बीना में हर के लम्हा नई तस्वीर

दस्तरस में न हो हालात तो फिर क्या कीजिए

sata le hamko jo dilchaspi hai unhe hamko satane me

दस्तरस में न हो हालात तो फिर क्या कीजिए वक़्त दिखलाए करिश्मात तो फिर क्या कीजिए, साहब ए