ग़ज़ल का हुस्न है और गीत का शबाब है वो…
ग़ज़ल का हुस्न है और गीत का शबाब है वो नशा है जिसमे सुखन का वही शराब है
Love Poetry
ग़ज़ल का हुस्न है और गीत का शबाब है वो नशा है जिसमे सुखन का वही शराब है
रात पिघली है तेरे सुरमई आँचल की तरह चाँद निकला है तुझे ढूँढने पागल की तरह, ख़ुश्क पत्तों
वो नवाज़िशे वो इनायते वो बिला वजह की शिकायतें कभी रूठना कभी मनाना वो बिखरी सिमटी ख्वाहिशे, वो
उसे मैं क्यूँ बताऊँ ??? मैंने उसको कितना चाहा है, बताया झूठ हो जाता है, सच्ची बात की
वो ख़ुद आँसू बहाएगा ज़रा तुम मर तो जाने दो मुझे वापस बुलाएगा ज़रा तुम मर तो जाने
फिर झूम उठा सावन फिर काली घटा छाई फिर दर्द ने करवट ली फिर याद तेरी आई, होंठो
चेहरे का ये निखार मुक़म्मल तो कीजिए ये रूप ये सिंगार मुक़म्मल तो कीजिए, रहने ही दे हुज़ूर
किसी तरंग किसी सर ख़ुशी में रहता था ये कल की बात है दिल ज़िन्दगी में रहता था,
ज़िन्दगी पाँव न धर ज़ानिब ए अंज़ाम अभी मेरे ज़िम्मे है अधूरे से कई काम अभी, अभी ताज़ा
कभी ख़ामोश रहोगी कभी कुछ बोलोगी हमें भुलाना भी चाहो तो भूला ना पाओगी, कोई पूछेगा बे वजह