जब ज़िंदगी सुकून से महरूम हो गई…

jab zindagi sukun se mahrum ho gai

जब ज़िंदगी सुकून से महरूम हो गई उन की निगाह और भी मासूम हो गई, हालात ने किसी

तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा…

tum door ho to pyar ka mausam na ayega

तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा अब के बरस बहार का मौसम न आएगा, चूमूँगा

न मिली छाँव कहीं, यूँ तो कई शज़र मिले…

naa mili chhanv kahin yun to kai shazar mile

न मिली छाँव कहीं, यूँ तो कई शज़र मिले वीरान ही मिले सफ़र में जो भी शहर मिले,

रौनक तुम्हारे दम से है लैल ओ नहार की…

raunak tumhare dam se hai lail o nahaar ki

रौनक तुम्हारे दम से है लैल ओ नहार की तुम आबरू हो आमद ए फ़सल ए बाहर की,

हर रिश्ता यहाँ बस चार दिन की कहानी है…

har rishta yahan bas char din ki kahani hai

हर रिश्ता यहाँ बस चार दिन की कहानी है अंज़ाम ए वफ़ा का सिला आँखों से बहता पानी

तलब की राहों में सारे आलम नए नए से…

talab ki raahon me saare alam naye naye se

तलब की राहों में सारे आलम नए नए से शजर हजर लोग शहर मौसम नए नए से, चमक

सुख़नवरी का बहाना बनाता रहता हूँ…

sukhanwari ka bahana banata rahta hoon

सुख़नवरी का बहाना बनाता रहता हूँ तेरा फ़साना तुझी को सुनाता रहता हूँ, मैं अपने आप से शर्मिंदा

फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आये सवालो की तरह…

falsafe ishq me pesh aaye sawalo ki tarah

फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आये सवालो की तरह हम परेशाँ ही रहे अपने ख्यालो की तरह, शीशागर बैठे

आँसू हो, उदासी हो और ख़ामोश चीत्कार हो…

aansoo ho udasi ho khamosh chitkar ho

आँसू हो, उदासी हो और ख़ामोश चीत्कार हो गज़ल कहनी हो तो पहले किसी से प्यार हो, कलम

हालात थे ख़राब या मैं ख़राब था…

halaat the kharab yaa main kharab tha

हालात थे ख़राब या मैं ख़राब था मेरे सवाल में शामिल जवाब था, ख़ुशी मेरी क़िस्मत ने छिनी