रखा न अब कहीं का दिल ए बेक़रार ने

rakha na ab kahin ka dil e beqarar ne

रखा न अब कहीं का दिल ए बेक़रार ने बर्बाद कर दिया ग़म ए बे इख़्तियार ने, दिल

तमन्ना दो दिलों की एक ही मालूम होती है

तमन्ना दो दिलों की

तमन्ना दो दिलों की एक ही मालूम होती है अब उनकी हर ख़ुशी अपनी ख़ुशी मालूम होती है,

इश्क़ कर के मुक़र गई होगी…

इश्क कर के मुकर

इश्क़ कर के मुक़र गई होगी वो तो लड़की है डर गई होगी, आदतें सब ख़राब कर के

बाद मरने के मेरे किसी केलब पे तो मेरा नाम होगा

baad marne ke mere kisi ke

बाद मरने के मेरे किसी केलब पे तो मेरा नाम होगा मातम होगा कहीं, कहीं शहनाइयों का एहतिमाम

आग बहते हुए पानी में लगाने आई

आग बहते हुए पानी

आग बहते हुए पानी में लगाने आई तेरे ख़त आज मैं दरिया में बहाने आई, फिर तेरी याद

होना नहीं अब उसने मेहरबान छोड़ दे

hona nahi ab usne mehrban

होना नहीं अब उसने मेहरबान छोड़ दे उसके लिए तू चाहे ये जहान छोड़ दे, कितनी उठाए हमने

पढ़ती रहती हूँ मैं सारी चिट्ठियाँ…

padhti rahti hoon main

पढ़ती रहती हूँ मैं सारी चिट्ठियांरात है और है तुम्हारी चिट्ठियां, आओ तो पढ़ कर सुनाऊँगी तुम्हेंलिख रखी

वो जो दिल के क़रीब होते है…

pyas jo umr bhar naa bujhi purani hogi

वो जो दिल के क़रीब होते है लोग वो भी अज़ीब होते है, पढ़ना लिखना जो जानते न

हमने कैसे यहाँ गुज़ारी है….

hamne kaise yahan guzari hai

हमने कैसे यहाँ गुज़ारी है अश्क खुनी है आह ज़ारी है, हम ही पागल थे जान दे बैठे

याद आता है मुझे छोड़ के जाने वाला

yaad aata hai mujhe chhod ke jaane wala

याद आता है मुझे छोड़ के जाने वाला मेरी हर शाम को रंगीन बनाने वाला, आज रो कर