मैंने माना कि तुम ज़ालिम नहीं हो मगर

मैंने माना कि तुम

मैंने माना कि तुम ज़ालिम नहीं हो मगर क्या मालूम था कि हम तुमसे डर जाएँगे, तेरी याद

हमें कोई गम न था, गम ए आशिकी से पहले

हमें कोई गम न था

हमें कोई गम न था, गम ए आशिकी से पहले न थी दुश्मनी किसी से, तेरी दोस्ती से

जाने क्यूँ आजकल तुम्हारी कमी अखरती है बहुत

jaane kyun aajkal

जाने क्यूँ आजकल तुम्हारी कमी अखरती है बहुत यादो के बंद कमरे में ज़िन्दगी सिसकती है बहुत, पनपने

जी चाहे तो शीशा बन जा, जी चाहे पैमाना बन जा

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जी चाहे तो शीशा बन जा, जी चाहे पैमाना बन जा शीशा पैमाना क्या बनना ? मय बन

घने बादलो से जो कभी थोड़ी धूप निकलती रहती

shaam se aaj saans bhari hai

घने बादलो से जो कभी थोड़ी धूप निकलती रहती आसरे उम्मीद के मुमकिन है ज़िन्दगी चलती रहती, हुस्न

क्या करेंगे आप मेरे दिल का मंज़र देख कर

zahar ke ghoont bhi hans hans ke piye jate hai

क्या करेंगे आप मेरे दिल का मंज़र देख कर ख़ामखा हैरान होंगे एक समन्दर देख कर, ये अमीरों

इतना एहसान तो हम पर वो ख़ुदारा करते

itna ehsan to ham par

इतना एहसान तो हम पर वो ख़ुदारा करते अपने हाथो से ज़िगर चाक हमारा करते, हमको तो दर्द

हर वक़्त किसी को मुकम्मल नज़ारा नहीं मिलता

har waqt kisi ko muqammal

हर वक़्त किसी को मुकम्मल नज़ारा नहीं मिलता उम्मीद जब रखो तो कहीं किनारा नहीं मिलता, वफाओं के

तमाम उम्र कटी उसकी मेज़बानी में

tamam umr kati uski

तमाम उम्र कटी उसकी मेज़बानी में बिछड़ गया था कभी जो भरी जवानी में, हमारे होने तलक सब

तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है

तू इस क़दर मुझे

तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है तुझे अलग से जो सोचू अजीब लगता है, जिसे ना