दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह…

kis simt chal padi hai khudai mere khuda

दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह फिर चाहे दीवाना कर दे या अल्लाह, मैनें तुझसे चाँद

बिखरे बिखरे सहमे सहमे रोज़ ओ शब देखेगा कौन…

bikhre bikhre sahme sahme roz o shab

बिखरे बिखरे सहमे सहमे रोज़ ओ शब देखेगा कौन लोग तेरे जुर्म देखेंगे सबब देखेगा कौन ? हाथ

ज़रीदे में छपी है एक ग़ज़ल दीवान जैसा है…

zaride me chhapi ek gazal deewan jaisa hai

ज़रीदे में छपी है एक ग़ज़ल दीवान जैसा है ग़ज़ल का फ़न अभी भी रेत के मैदान जैसा

ज़िन्दगी बस एक ये लम्हा मुझे भी भा गया…

zindagi bas ek ye lamha mujhe bhaa gaya

ज़िन्दगी बस एक ये लम्हा मुझे भी भा गया आज बेटे के बदन पर कोट मेरा आ गया,

समझता खूब है वो भी बयान की कीमत…

samjhta hai wo bhi khoob bayan ki qeemat

समझता खूब है वो भी बयान की कीमत चुका रहा है जो अब भी ज़ुबान की कीमत, इसी

काँटे ही चुभन दे ज़रूरी तो नहीं…

kaante hi chubhan de zaruri to nahi hai

काँटे ही चुभन दे ज़रूरी तो नहीं फूल भी नश्तर चभोते है, बारिश ही भिगोए तन मन ज़रूरी

ना जाने कैसी तक़दीर पाई है…

naa jaane kaisi taqdeer paai hai

ना जाने कैसी तक़दीर पाई है जो आया आज़मा के चला गया, कल तक गले लगाने वाला भी

दुनियाँ जिसे कहते है जादू का खिलौना है…

duniyan jise kahte hai mitti ka khilauna hai

दुनियाँ जिसे कहते है जादू का खिलौना है मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है,

कोई दर्द कोई ख़ुशी कोई अरमान अब नहीं…

koi dard koi khushi koi arman ab nahi

कोई दर्द कोई ख़ुशी कोई अरमान अब नहीं ज़िस्म तो है मगर जान अब नहीं, जिस कदर था

ज़िन्दगी यूँ हुई बसर तन्हा…

zindagi yun hui basar tanha kafila saath aur safar tanha

ज़िन्दगी यूँ हुई बसर तन्हा काफ़िला साथ और सफ़र तन्हा, अपने साये से चौक जाते है उम्र गुज़री