गर्म रफ़्तार है तेरी ये पता देते हैं…
गर्म रफ़्तार है तेरी ये पता देते हैं दम बदम लौ तेरे नक़्श ए कफ़ ए पा देते
Life Poetry
गर्म रफ़्तार है तेरी ये पता देते हैं दम बदम लौ तेरे नक़्श ए कफ़ ए पा देते
कोई नई चोट फिर से खाओ ! उदास लोगो कहा था किसने कि मुस्कुराओ ! उदास लोगो, गुज़र
किताबों में मेरे फ़साने ढूँढते हैं नादां हैं गुज़रे ज़माने ढूँढते हैं, जब वो थे तलाश ए ज़िंदगी
अब के रुत बदली तो ख़ुशबू का सफ़र देखेगा कौन ज़ख़्म फूलों की तरह महकेंगे पर देखेगा कौन
एक दिन ख़ुद को अपने पास बिठाया हमने पहले यार बनाया फिर समझाया हमने, ख़ुद भी आख़िर कार
बरसों जुनूँ सहरा सहरा भटकाता है घर में रहना यूँही नहीं आ जाता है, प्यास और धूप के
तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है न दोस्ती मुझ से और प्यार कोई और है न
ये चुभन अकेलेपन की, ये लगन उदास शब से मैं हवा से लड़ रहा हूँ, तुझे क्या बताऊँ
जिनके घरो में आज भी चूल्हा नहीं जला खाना गर हम उनको खिलाएँ तो ईद है, पानी नहीं
आया ही नहीं कोई बोझ अपना उठाने को कब तक मैं छुपा रखता इस ख़्वाब ख़ज़ाने को ?