अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है…

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अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है हमारी आँख में एक शख़्स बेतहाशा है, ज़रा सी चाय

तुम्हे न फिर से सताएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़…

tumhe fir na satayenge ham khuda hafiz

तुम्हे न फिर से सताएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़ कि अब न लौट के आएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़, रखेंगे

दिल ने जब जब तुझ पे इंहिसार किया…

dil ne jab jab tujh pe inhisar kiya

दिल ने जब जब तुझ पे इंहिसार किया तुमने ख़ुद को और भी बे ऐतबार किया, तू चल

नादान न बन इतना तू हर सवाल का जवाब जानता है…

nadaan na ban tu har sawal ka jawab janta hai

नादान न बन इतना तू हर सवाल का जवाब जानता है मेरी नींदे चुराने वाले तू मेरा हर

वही बहाना बना है उदास होने का…

bahut guman tha mausam shanas hone ka

बहुत गुमान था मौसम शनास होने का वही बहाना बना है उदास होने का, बदन को काढ़ लिया

अना से तर्क ए अना तक सफ़र किया जाए…

bahut kathin hi sahi magar kiya jaaye

बहुत कठिन ही सही मगर किया जाए अना से तर्क ए अना तक सफ़र किया जाए, जब अपनी

मैं जो महका तो मेरी शाख़ जला दी उसने…

sabz mausam me zard hawa dee usne

मैं जो महका तो मेरी शाख़ जला दी उसने सब्ज़ मौसम में मुझे ज़र्द हवा दी उसने, पहले

नग्मो से भरे दरिया थे रवां गीतों से भरी हरियाली थी…

geeto se bhari hariyali thi

इस देस का रंग अनोखा था इस देस की बात निराली थी नग्मो से भरे दरिया थे रवां

एक वा’दा है किसी का जो वफ़ा होता नहीं…

ulat de unke chehre se naqab

एक वा’दा है किसी का जो वफ़ा होता नहीं वर्ना इन तारों भरी रातों में क्या होता नहीं,

मेरे नग़्मात को अंदाज़ ए नवा याद नहीं…

hai dua yaad magar hraf e dua

है दुआ याद मगर हर्फ़ ए दुआ याद नहीं मेरे नग़्मात को अंदाज़ ए नवा याद नहीं, मैं