आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है जिंदगी

आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है जिंदगी
हम ग़रीबों की नज़र में क़हर है जिंदगी,

भुखमरी की धूप में कुम्हला गई अस्मत की बेल
मौत के लम्हात से भी तल्ख़तर है जिंदगी,

डाल पर मज़हब की पैहम खिल रहे दंगों के फूल
ख़्वाब के साए में फिर भी बेख़बर है ज़िंदगी,

रोशनी की लाश से अब तक जिना करते रहे
ये वहम पाले हुए शम्स ओ क़मर है ज़िंदगी,

दफ़्न होता है जहाँ आ कर नई पीढ़ी का प्यार
शहर की गलियों का वो गंदा असर है ज़िंदगी..!!

~अदम गोंडवी


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