तेरा लहजा तेरी पहचान मुबारक हो तुझे

तेरा लहजा तेरी पहचान मुबारक हो तुझे
तेरी वहशत तेरा हैजान मुबारक हो तुझे,

मैं मोहब्बत का पुजारी हूँ सो मैं जाता हूँ
यानि नफ़रत का ये सामान मुबारक हो तुझे,

आँख में तंज़ ओ रऊनत की चमक बाक़ी रहे
लब पे ये तल्ख़ सी मुस्कान मुबारक हो तुझे,

मैं दुआ करता हूँ तू शहर ए चराग़ाँ में रहे
तेरा हर ख़्वाब ए गुलिस्तान मुबारक हो तुझे,

तू हुकूमत का है शौक़ीन तेरा बनता है
बेबसी शहर की सुल्तान मुबारक हो तुझे,

मैं तो मर कर भी मेंरी जान बचा लूँगा उसे
तुझ में मरता हुआ इंसान मुबारक हो तुझे,

जा रहा हूँ मैं तेरे शहर से तेरी यादें ले कर
मेरे दिलबर तेरा ये गुलशन मुबारक हो तुझे,

ये बिछड़ना ही अगर हल है तो रंजिश कैसी ?
जाओ ना जाओ मेंरी जान मुबारक हो तुझे..!!

~मोहम्मद शाहिद फ़ीरोज़


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