जिनकी सूरत पे तुम्हारा सारा शहर मरता है…

ये जो बात बात में उन हसीन आँखों की बात करते हो
वो उन आँखों में हमारा अक्स रखते है,

और ये जिनके ख़्वाब तुम्हारी आँखों में है न
वो अपने ख़्वाबो में हमें आदाब करते है,

जिनके सामने आने पर तुम्हारी निगाह नहीं हटती
वो मुस्कुरा के लम्हों तक हमें ही तकते है,

जिनकी सूरत पर तुम्हारा सारा शहर मरता है
वो है जो फ़क़त एक हम ही पे मरते है,

जिनके इंतज़ार में तुम एक मुद्दत से जाग रहे हो
वो तो आँखों से मुन्तज़िर हमारे लगते है,

जिनके क़सीदे सुनाते सुनाते तुम नहीं थकते
सुना है वो हर वक़्त हमारी ही बात करते है,

ये जो कहते कि उनके सामने लफ्ज़ नहीं मिलते
वो हमसे आँख झुका कर के बात करते है,

जिनकी महफ़िल में अदब से तुम्हारे लब नहीं हिलते
वो हमसे महफ़िल में ही मुलाक़ात करते है,

जिनके दीदार को हर लम्हा तड़पती है तुम्हारी नज़रे
वो ख़ुद हमारी एक झलक को तरसते है,

तुम्हे मतलूब है जो शख्स अपनी ज़िन्दगी के हर सफ़र में
वही हमें अपनी ज़िन्दगी की मंज़िल समझते है,


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