छोटी छोटी बातों पर परिवार बदलते देखे
वक़्त ए ज़रूरत सब यार बदलते देखे,
अब तो यकीन उठ सा गया है ज़माने से
अक्सर अपनों के किरदार बदलते देखे,
जितना दिया ख़ुदा ने उतनी हवस बढ़ी
हर रोज़ लोगो के व्यापार बदलते देखे,
ख़बरों में छपना था नापाक इरादों को
ज़र की बदौलत अख़बार बदलते देखे..!!
➤ आप इन्हें भी पढ़ सकते हैं










Discover more from Bazm e Shayari :: बज़्म ए शायरी -Hindi / Urdu Poetry, Ghazals, Shayari
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

















