दिल में है क्या अज़ाब कहे तो पता चले
दीवार ख़ामोशी की ढहे तो पता चले,
सब कुछ ही बाँटने को चली आती क्यूँ नदी ?
उस की तरह से कोई बहे तो पता चले,
बेटे तू जानता नहीं है माँ की अहमियत
माँ की तरह तू दर्द सहे तो पता चले,
कैसे बताए कोई जियो कैसे ज़िंदगी ?
तू पंछियों के साथ रहे तो पता चले,
पीने को पानी भी न हो रोटी की बात क्या
नेता जी भूक तू यूँ सहे तो पता चले..!!
~आतिश इंदौरी
सिखाएँ दस्त ए तलब को अदा ए बेबाकी
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