ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे 

ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे
तू मिल गया है तो ख़ुद अपनी ज़ात से भी गए,

बिछड़ के खत भी न लिखे उदास यारों ने
कभी कभी की अधूरी सी बात से भी गए,

वो शाख शाख लचकते हुए बदन मोहसिन
मुझे तो मिल न सके तेरे हाथ से भी गए..!!

~अज्ञात

आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था

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