अक़्ल बड़ी है या फिर भालू दानिश वाले ग़ौर करें
शाख़ पे बैठा है क्यों उल्लू दानिश वाले ग़ौर करें,
जिसका जुर्म उसी का थाना वही पार्टी सत्ता में
दाँव उसी में है क्यों चालू दानिश वाले ग़ौर करें,
पढ़े लिखे खाते पीते मोटे ताज़े लड़की लड़के
बदबू को कहते हैं ख़ुशबू दानिश वाले ग़ौर करें,
ग़ुंडो की अज़मत के आगे इंक़लाब छुटभैया है
किस उसूल का है ये पहलू दानिश वाले ग़ौर करें,
जिसके पास मिले चिकनाई वही पार्टी अच्छी है
लेनिन से ऊँचा है लालू दानिश वाले ग़ौर करें..!!
~संजय चतुर्वेदी
आदमी ही आदमी के बीच में आने लगा
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