वो मुहब्बत भी मौसम की तरह निभाता है
कभी बरसता है कभी बूँद बूँद को तरसाता है,
पल में कहता है ज़माने में फक़त तेरे हैं
पल में इज़हार ए मुहब्बत से मुक़र जाता है,
भरी महफ़िल में दुश्मनों की तरह मिलता है
और दुआओं में मेरा ही नाम लिए जाता है,
दयार ए गैर में मुझ को ही तलाश करता है
गर मिलूँ तो पास से चुप चाप गुज़र जाता है,
लाख मौसम की तरह रंग बदलता रहे मगर
आज भी टूट के शिद्दत से हमें ही चाहता है..!!
➤ आप इन्हें भी पढ़ सकते हैं










Discover more from Bazm e Shayari :: बज़्म ए शायरी -Hindi / Urdu Poetry, Ghazals, Shayari
Subscribe to get the latest posts sent to your email.



















