नुक़सान हो रहा है बहुत कारोबार में

नुक़सान हो रहा है बहुत कारोबार में
अब्बा पड़े हैं जब से पड़ोसन के प्यार में,

सौ कोशिशों से आए थे चंदिया पे चार बाल
दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में,

ना अहल ही मिली मुझे हर एक अहलिया
मैं ने किए निकाह सब यारो उधार में,

बनती न सुर्मा पस्लियाँ और फूटता न सर
होती अगर ज़बान मेरे इख़्तियार में,

अंग्रेज़ी गुफ़्तुगू का बड़ा फ़ाएदा हुआ
छे सात चाँद लग गए मेरे वक़ार में,

जब से मकाँ बदल गईं दोनों पड़ोसनें
लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में..!!

~अहमद अल्वी

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