रूबरू हो कर भी इस ज़माने में
किसी पे ऐतबार कहाँ करते है लोग ?
मतलबपरस्तो की इस दुनियाँ में
बेलौस प्यार कहाँ करते है लोग ?
मसलहत और खुदगर्ज़ी ना हो
शामिल तो याद कहाँ करते है लोग ?
खाने में नमक की हो जैसे ज़रूरत
वैसे ही यहाँ इस्तेमाल करते है लोग..!!
➤ आप इन्हें भी पढ़ सकते हैं










Discover more from Bazm e Shayari :: बज़्म ए शायरी -Hindi / Urdu Poetry, Ghazals, Shayari
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

















