किसी का दिखावे का प्यार नहीं

बेलौस मुफ़्लिसी भी है क़ुबूल मुझे
मगर अमीर ए शहर बदकार नहीं,

दुश्मन ए बदतर से भी निभा लूँगा
मगर दोस्त कोई भी अदाकार नहीं,

दुश्मनी में रहे क़ायम मेयार नवाब
मुझे कत्तई पसंद ख़ूँ ए ऐतबार नहीं,

खुले दिल की नफरते भी पसंद है मुझे
पर किसी का दिखावे का प्यार नहीं..!!

2 thoughts on “किसी का दिखावे का प्यार नहीं”

  1. बहुत उम्दा शायरी का खज़ाना है बज़्म ए शायरी…..👌🏻

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