वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग

वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग
हमसाए के लहू में नहाए हुए हैं लोग,

ये तिश्नगी गवाह है घायल है इनकी रूह
चेहरे ही तबस्सुम से सजाए हुए हैं लोग,

ग़ैरत मरी तो वाक़ई इंसान मर गया
जीने की सिर्फ़ रस्म निभाए हुए हैं लोग,

कहने को कह रहे हैं मुबारक हो नया साल
खंज़र भी आस्तीं में छुपाए हुए हैं लोग..!!

~अदम गोंडवी

सहर ने मसर्रत का नग़्मा सुनाया

Discover more from Bazm e Shayari :: बज़्म ए शायरी -Hindi / Urdu Poetry, Ghazals, Shayari

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply