तेरी निगाह के जादू बिखरते जाते हैं

तेरी निगाह के जादू बिखरते जाते हैं
जो ज़ख़्म दिल को मिले थे वो भरते जाते हैं,

तेरे बग़ैर वो दिन भी गुज़र गए आख़िर
तेरे बग़ैर ये दिन भी गुज़रते जाते हैं,

लिए चलो मुझे दरिया ए शौक़ की मौजो
कि हमसफ़र तो मेरे पार उतरते जाते हैं,

तमाम उम्र जहाँ हँसते खेलते गुज़री
अब उस गली में भी हम डरते डरते जाते हैं,

मैं ख़्वाहिशों के घरौंदे बनाए जाता हूँ
वो मेहनतें मेरी बर्बाद करते जाते हैं..!!

~नासिर काज़मी

दफ़अ’तन दिल में किसी याद ने ली अंगड़ाई

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