पेड़ मुझे तब हसरत से देखा करते थे
जब मैं जंगल में पानी लाया करता था,
थक जाता था बादल साया करते करते
और फिर मैं बादलो पे साया करता था,
बैठा रहता था मैं साहिल पे सारा दिन
दरियाँ भी मुझसे जान छुड़ाया करता था,
बिन्त ए सहरा रूठा करती थी मुझ से
मैं सहरा से जब रेत चुराया करता था..!!
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