हादसों का शहर है संभल जाइए

haadso ka shahar hai sambhal jaaiye

हादसों का शहर है संभल जाइए कौन कब किस डगर है संभल जाइए, नेक रस्ते पे चलते हुए

क्यूँ ज़मीं है आज प्यासी इस तरह ?

kyun zamin hai aaj pyasi is tarah

क्यूँ ज़मीं है आज प्यासी इस तरह ? हो रही नदियाँ सियासी इस तरह, जान की परवाह किसे

लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार…

laga jab aks e abroo dekhne dildar paani men

लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार पानी में बहम हर मौज से चलने लगी तलवार पानी में,

मेरे ख़ुदा मुझे वो ताब ए नय नवाई दे

mere khuda mujhe taab e nay e nawai de

मेरे ख़ुदा मुझे वो ताब ए नय नवाई दे मैं चुप रहूँ भी तो नग़्मा मेरा सुनाई दे,

किस के नाम लिखूँ जो अलम गुज़र रहे हैं

kis ke naam likhoon jo alam guzar rahe hai

किस के नाम लिखूँ जो अलम गुज़र रहे हैं मेरे शहर जल रहे हैं मेरे लोग मर रहे

मैं कैसे जियूँ गर ये दुनिया हर आन…

main kaise jiyoon gar ye duniya

मैं कैसे जियूँ गर ये दुनिया हर आन नई तस्वीर न हो ये आते जाते रंग न हों

परिंदों के चोंच भर लेने से…

parindo ke chonch bhar lene se

परिंदों के चोंच भर लेने से कभी सागर सूखा नहीं करते, हवाओं के रुख सूखे पत्तो से अपना

क़िस्मत का लिखा मिटा नहीं सकते…

qismat ka likha mita nahi sakti

क़िस्मत का लिखा मिटा नहीं सकते अनहोनी को होनी बना नहीं सकते, ज़माने में हस्ब ए आरज़ू किसी

वही आँगन वही खिड़की वही दर…

wahi aangan wahi khidki wahi dar yaad aata hai

वही आँगन वही खिड़की वही दर याद आता है अकेला जब भी होता हूँ मुझे घर याद आता

वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम ए ज़र…

vatan ko kuchh nahi khatra nizam e zar hai khatre me

वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम ए ज़र है ख़तरे में हक़ीक़त में जो रहज़न है वही रहबर