मैंने कहा कि दिल में तो अरमान हैं बहुत
उस ने कहा कि आप तो नादान हैं बहुत,
मैंने कहा कि मुझ को है जन्नत की आरज़ू
उस ने कहा कि वाक़िफ़ ए ईमान हैं बहुत,
मैंने कहा कि महका हुआ एक गुलाब हूँ
उस ने कहा ज़मीं पे गुलिस्तान हैं बहुत,
मैंने कहा कि मेरी पनाहों में आइए
उस ने कहा कि मेरे निगहबान हैं बहुत,
मैंने कहा कि एक मुरस्सा ग़ज़ल हूँ मैं
उस ने कहा कि ऐसे तो दीवान हैं बहुत,
मैंने कहा कि तर्क ए वफ़ा से हूँ शर्मसार
उस ने कहा कि हम भी पशेमान हैं बहुत,
मैं ने कहा कि रखेगा ‘मोहसिन’ अदब की लाज
उस ने कहा कि वैसे तो इम्कान हैं बहुत..!!
~दाऊद मोहसिन