किए वादों का निभाना बाक़ी है
और अभी उनको मनाना बाक़ी है,
मुझे अपना भी समझना बाक़ी है
और उनका भी संभलना बाक़ी है,
ये तो सबको है पता हम उनके है
ये बात बस उनको बताना बाक़ी है,
हमने तो सोच समझ कर वोट दिया
अब बस उनका चोट लगाना बाक़ी है,
न जान सके सेवक है या शासक है ?
हम सबको ये बात समझना बाक़ी है,
उनकी ज़ुल्फो में उलझ कर देख लिया
अब उनके दिल में उलझना बाक़ी है,
फूल जो तुमने चाहे वो खिल तो गए
पर लबो पे मुस्कान का खिलना बाक़ी है,
करने को वादे तो हज़ारो तुमने किए
पर उन सबका ज़मीं पे उतरना बाक़ी है,
कुर्सी पे बैठना तुमने चाहा और बैठ गए
पर दिलो में उतरना अब भी बाक़ी है..!!
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