लहूलुहान परों पर उड़ान रख देना
शिकस्तगी में नया इम्तिहान रख देना,
मेरे बदन पे लबों के निशान रख देना
नई ज़मीं पे नया आसमान रख देना,
अगर कभी मेरा सच जानने की ख़्वाहिश हो
किसी भी शख़्स के मुँह में ज़बान रख देना,
हमारे घर की ये दीवार कितनी तन्हा है
जो हो सके तो कोई साएबान रख देना,
लड़ाई में जो किसी का सुहाग चीख़ उठे
सलीम हाथ से तीर ओ कमान रख देना..!!
~सलीम अंसारी
होंठों से लफ़्ज़ ज़ेहन से अफ़्कार छीन ले
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