क्या अंधेरा है क्या उजाला है

क्या अंधेरा है क्या उजाला है
ये नज़रिये का बस हवाला है,

रंग बस एक ही है दुनिया में
इश्क़ ने हुस्न पर जो डाला है,

रोज़ सूरज सहर में घर आए
शाम को रोज़ घर निकाला है,

हैं धनक में जो दिखते सातों रंग
वो तबस्सुम ने तेरे डाला है,

कौन खोलेगा दिल का वो कमरा
नाम का तेरे जिस पे ताला है,

ज़िंदगी की किताब का पन्ना
एक उजला है एक काला है,

शम्स कहती है जिस को ये दुनिया
वो मेरे दिल का एक छाला है..!!

~चंद्रशेखर पाण्डेय शम्स

सूरज उस के घर की कोई खिड़की है

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