जिसे तुम प्यार समझे थे वो कारोबार था हमदम
यहाँ सब अपने मतलब में मुहब्बत साथ रखते है,
जो हर पल हँसते रहते हो, उन्हें तुम ख़ुश समझते हो ?
अरे नादाँ ! वो हँसने में महारत ख़ास रखते है,
ये जो ख़ामोश फिरते है, जो तन्हाई में रहते है
ये अपने आप महफ़िल में, ख़ुदी को पास रखते है,
बिकाऊ माल है सब कुछ, वो जज़्बे हो या बन्दे हो
यहाँ मालिक और गाहक अपनी क़ीमत साथ रखते है,
ये हाथो की लकीरें और शिकन आलूद पेशानी
बताते है कि हम सब अपनी क़िस्मत साथ रखते है,
मैं बेहद आम बन्दा हूँ, मेरी सब आम बातें है
मगर मेरे अल्फाज़ है शायद, जो मुझको ख़ास रखते है,
ऐ मक्कारों वो गुर तो बतला दो कि जिसमे तुम माहिर हो
वो जिसमे नफरतों के बीज और उल्फत साथ रखते है..!!
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