जो मिला उससे गुज़ारा न हुआ…

जो मिला उससे गुज़ारा न हुआ
जो हमारा था, वो हमारा न हुआ,
 
हम किसी और से मंसूब हुए
क्या ये नुक़सान तुम्हारा न हुआ,
 
बे तक़ल्लुफ़ भी वो हो सकते थे
मगर हमसे कोई इशारा न हुआ,
 
दोनों ही एक दूसरे पर मरते रहे
कोई भी अल्लाह को प्यारा न हुआ..!!

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