जब से तू ने मुझे दीवाना बना रखा है
संग हर शख़्स ने हाथों में उठा रखा है,
उस के दिल पर भी कड़ी इश्क़ में गुज़री होगी
नाम जिस ने भी मोहब्बत का सज़ा रखा है,
पत्थरो आज मेंरे सर पे बरसते क्यूँ हो
मैं ने तुम को भी कभी अपना ख़ुदा रखा है,
अब मेरी दीद की दुनिया भी तमाशाई है
तू ने क्या मुझ को मोहब्बत में बना रखा है ?
पी जा अय्याम की तल्ख़ी को भी हँस कर नासिर
ग़म को सहने में भी क़ुदरत ने मज़ा रखा है..!!
~हकीम नासिर