घुटन भी देख रही है मुझे हैरानी से

ghutan bhi dekh rahi

घुटन भी देख रही है मुझे हैरानी से कहीं मैं ऊब ही जाऊँ न उस जवानी से, सज़ा

इस मिट्टी को ऐसे खेल खिलाया हम ने

is mitti ko aise

इस मिट्टी को ऐसे खेल खिलाया हम ने ख़ुद को रोज़ बिगाड़ा रोज़ बनाया हम ने, जो सोचा

इसी लिए तो नहीं कटती रात आदमी की

isi liye to nahin

इसी लिए तो नहीं कटती रात आदमी की ख़ुदा की ज़ात से मुश्किल है ज़ात आदमी की, नए

है सफ़र में कारवान बहर ओ बर किस के लिए

hai safar me kaarwaan

है सफ़र में कारवान बहर ओ बर किस के लिए हो रहा है एहतिमाम ए ख़ुश्क ओ तर

निराला अजब नकचढ़ा आदमी हूँ

niraala azab nakchadha aadmi

निराला अजब नकचढ़ा आदमी हूँ जो तुक की कहो बेतुका आदमी हूँ, बड़े आदमी तो बड़े चैन से

दे रहे हैं जिस को तोपों की सलामी आदमी

de rahe hain jis

दे रहे हैं जिस को तोपों की सलामी आदमी क्या कहूँ तुम से कि है कितना हरामी आदमी,

ये मत पूछो कि कैसा आदमी हूँ

ye mat puchho ki

ये मत पूछो कि कैसा आदमी हूँ करोगे याद, ऐसा आदमी हूँ, मेरा नाम ओ नसब क्या पूछते

उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा

us ke dushman hai

उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा, इतना

राहज़न आदमी रहनुमा आदमी

raahjan aadmi rahnuma aadmi

राहज़न आदमी रहनुमा आदमी बार हा बन चुका है ख़ुदा आदमी, हाए तख़्लीक़ की कार पर्दाज़ियाँ ख़ाक सी

कहानी ठीक बनती है नज़ारें ठीक मिलते हैं

kahani thik banti hai

कहानी ठीक बनती है नज़ारें ठीक मिलते हैं अमूमां वक़्त अच्छा हो तो सारे ठीक मिलते हैं, वजह