लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार…

laga jab aks e abroo dekhne dildar paani men

लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार पानी में बहम हर मौज से चलने लगी तलवार पानी में,

किस के नाम लिखूँ जो अलम गुज़र रहे हैं

kis ke naam likhoon jo alam guzar rahe hai

किस के नाम लिखूँ जो अलम गुज़र रहे हैं मेरे शहर जल रहे हैं मेरे लोग मर रहे

मैं कैसे जियूँ गर ये दुनिया हर आन…

main kaise jiyoon gar ye duniya

मैं कैसे जियूँ गर ये दुनिया हर आन नई तस्वीर न हो ये आते जाते रंग न हों

क़िस्मत का लिखा मिटा नहीं सकते…

qismat ka likha mita nahi sakti

क़िस्मत का लिखा मिटा नहीं सकते अनहोनी को होनी बना नहीं सकते, ज़माने में हस्ब ए आरज़ू किसी

वही आँगन वही खिड़की वही दर…

wahi aangan wahi khidki wahi dar yaad aata hai

वही आँगन वही खिड़की वही दर याद आता है अकेला जब भी होता हूँ मुझे घर याद आता

वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम ए ज़र…

vatan ko kuchh nahi khatra nizam e zar hai khatre me

वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम ए ज़र है ख़तरे में हक़ीक़त में जो रहज़न है वही रहबर

न ज़रूरत है दवा की न दुआ की दोस्तों !

naa zarurat dawa ki naa dua ki dosto

न ज़रूरत है दवा की न दुआ की दोस्तों ! दिल की गहराई से ज्यादा दर्द के फोड़े

ये और बात दूर रहे मंज़िलों से हम

ye aur baat rahe manzilo se door ham

ये और बात दूर रहे मंज़िलों से हम बच कर चले हमेशा मगर क़ाफ़िलों से हम, होने को

ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं

ye sochna galat hai ki tum par nazar

ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बेख़बर नहीं, अब तो

आ जाए वो मिलने तो मुझे ईद मुबारक

aa jaaye wo milne to mujhe eid mubarak

आ जाए वो मिलने तो मुझे ईद मुबारक मत आए ब हर हाल उसे ईद मुबारक, ऐसा हो