एक तारीख़ मुक़र्रर पे तो हर माह मिले

ek tarikh muqarrar pe to har maah mile

एक तारीख़ मुक़र्रर पे तो हर माह मिले जैसे दफ़्तर में किसी शख़्स को तनख़्वाह मिले, रंग उखड़

हर एक हज़ार में बस पाँच सात हैं…

har ek hazaar me bas panch saath log hai hum log

हर एक हज़ार में बस पाँच सात हैं हम लोग निसाब ए इश्क़ पे वाजिब ज़कात हैं हम

खेल दोनों का चले तीन का दाना न पड़े

khel dono ka chale teen ka daana na pade

खेल दोनों का चले तीन का दाना न पड़े सीढ़ियाँ आती रहें साँप का ख़ाना न पड़े, देख

तू काश मिले मुझको अकेली तो बताऊँ

tu kaash mile mujhko akeli to bataaoo

तू काश मिले मुझको अकेली तो बताऊँ सुलझे मेरी क़िस्मत की पहेली तो बताऊँ, आने से तेरे पहले

ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है

zulf o rukh ke saaye me zindagi guzaari hai

ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है धूप भी हमारी है छाँव भी हमारी है, ग़मगुसार

और सब भूल गए हर्फ़ ए सदाक़त लिखना

aur sab bhul gaye harf e sadakat likhna

और सब भूल गए हर्फ़ ए सदाक़त लिखना रह गया काम हमारा ही बग़ावत लिखना, लाख कहते रहें

अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं

apno ne wo ranz diya hai begaane yaad aate hai

अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं देख के उस बस्ती की हालत वीराने याद

अफ़सोस तुम्हें कार के शीशे का हुआ है

afsos tumhe kaar ke shishe ka hua hai

अफ़सोस तुम्हें कार के शीशे का हुआ है परवाह नहीं एक माँ का जो दिल टूट गया है,

ये किस रश्क ए मसीहा का मकाँ है

ye kis rashq e masiha ka maqaan hai

ये किस रश्क ए मसीहा का मकाँ है ज़मीं याँ की चहारुम आसमाँ है, ख़ुदा पिन्हाँ है आलम

हिज़्र के मौसम में ये बारिश का बरसना…

hizr ke mausam me ye baarish ka barsana kaisa

हिज़्र के मौसम में ये बारिश का बरसना कैसा ? एक सहरा में समन्दर का गुज़रना कैसा ?