ज़ुल्फ़, अँगड़ाई, तबस्सुम, चाँद, आईना…

zulf angdaai chaand tabassum aaina gulab

ज़ुल्फ़, अँगड़ाई, तबस्सुम, चाँद, आईना, गुलाब भुखमरी के मोर्चे पर ढल गया इन सब का शबाब, पेट के

तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है

teer par teer lagaao tumhe dar kiska hai

तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है सीना किस का है मेरी जान जिगर किस का

न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के…

naa mahalo ki bulandi se naa lafzo ke nagine se

न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से तमद्दुन में निखार आता है घीसू के पसीने

चाँद है ज़ेर ए क़दम सूरज खिलौना…

chaand hai zer e nazar sooraj khilauna ho gaya

चाँद है ज़ेर ए क़दम सूरज खिलौना हो गया हाँ, मगर इस दौर में क़िरदार बौना हो गया,

क्यूँ पत्थर को दिल में बसाए बैठे हो ?

kyun patthar ko dil me basaye baithe ho

क्यूँ पत्थर को दिल में बसाए बैठे हो ? वो अपना था ही नहीं जिसे अपना बनाए बैठे

आज सीलिंग फैन से लटकी हुई है

aaj sealing fain se latki hui hai

आज सीलिंग फैन से लटकी हुई है ये मुहब्बत किस कदर भटकी हुई है, गैरो के कंधो पर

ढूँढ़ते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी

dhoondhte kya ho in aankhon me kahani meri

ढूँढ़ते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी ख़ुद में गुम रहना तो आदत है पुरानी मेरी, भीड़

भूख के एहसास को शेर ओ सुख़न…

bhookh ke ehsas ko sher o sukhan tak le chalo

भूख के एहसास को शेर ओ सुख़न तक ले चलो या अदब को मुफ़लिसों की अंजुमन तक ले

आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है जिंदगी

aap kahte hai saraapa gulmuhar hai zindagi

आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है जिंदगी हम ग़रीबों की नज़र में क़हर है जिंदगी, भुखमरी की धूप

वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई…

wo jiske hath me chhale hai pairo me bivaai hai

वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई है उसी के दम से रौनक आपके बंगले में