नाम से गाँधी के चिढ़ और बैर आज़ादी से है

नाम से गाँधी के चिढ़

नाम से गाँधी के चिढ़ और बैर आज़ादी से है नाम से गाँधी के चिढ़ और बैर आज़ादी

कभी ख़ामोश बैठोगे, कभी कुछ गुनगुनाओगे

कभी ख़ामोश बैठोगे कभी

कभी ख़ामोश बैठोगे, कभी कुछ गुनगुनाओगे कभी ख़ामोश बैठोगे, कभी कुछ गुनगुनाओगे मैं उतना ही याद आऊँगा मुझे

और क्या करता बयान ए गम तुम्हारे सामने

और क्या करता बयान

और क्या करता बयान ए गम तुम्हारे सामने मेरी आँखें हो गई पुरनम तुम्हारे सामने, हम जुदाई में

जब भी हँसी की गर्द में चेहरा छुपा लिया

जब भी हँसी की

जब भी हँसी की गर्द में चेहरा छुपा लिया   जब भी हँसी की गर्द में चेहरा छुपा

बुरी है कीजिए नफ़रत निहायत

बुरी है कीजिए नफ़रत

बुरी है कीजिए नफ़रत निहायत बुरी है कीजिए नफ़रत निहायत मिटाए दिल से सदियों की अदावत चलो हम

हमेशा साथ रहने की आदत कुछ नहीं होती

हमेशा साथ रहने की

हमेशा साथ रहने की आदत कुछ नहीं होती जो लम्हा मिल गए जी लो, रियाज़त कुछ नहीं होतीं,

तेरी जुल्फें बिखरने को घटा कह दूँ तो कैसा हो ?

तेरी जुल्फें बिखरने को

तेरी जुल्फें बिखरने को घटा कह दूँ तो कैसा हो ?   तेरी जुल्फें बिखरने को घटा कह

एक पल में एक सदी का मज़ा हम से पूछिए

एक पल में एक

एक पल में एक सदी का मज़ा हम से पूछिए एक पल में एक सदी का मज़ा हम

चौंक चौंक उठती है महलों की फ़ज़ा रात गए

चौंक चौंक उठती है

चौंक चौंक उठती है महलों की फ़ज़ा रात गए चौंक चौंक उठती है महलों की फ़ज़ा रात गए

ज़माना आज नहीं डगमगा के चलने का

ज़माना आज नहीं डगमगा

ज़माना आज नहीं डगमगा के चलने का ज़माना आज नहीं डगमगा के चलने का सम्भल भी जा कि