आँखों से मिरी इस लिए लाली नहीं जाती…

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आँखों से मिरी इस लिए लाली नहीं जातीयादों से कोई रात जो ख़ाली नहीं जाती, अब उम्र न

बाँध ले हाथ पे सीने पे सजा ले तुमको…

बाँध ले हाथ पे

बाँध ले हाथ पे सीने पे सजा ले तुमकोजी में आता है कि ताबीज़ बना ले तुमको, फिर

जो रहता है दिल के क़रीब…

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जो रहता है दिल के क़रीबअक्सर वही दूर हुआ करता है, जो नहीं हो मयस्सर हमकोवही मतलूब हुआ

संभाला होश है जबसे मुक़द्दर सख्त तर निकला…

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संभाला होश है जबसेमुक़द्दर सख्त तर निकलाबड़ा है वास्ता जिससेवही ज़ेर ओ ज़बर निकला, सबक़ देता रहा मुझकोसदा

तुम्हे बहार की कलियाँ जवाँ पुकारती है…

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तुम्हे बहार की कलियाँ जवाँ पुकारती हैकहती मरहबा ! सब तितलियाँ पुकारती है, न बोसा प्यार का अंबर

होश में रह के बे हवास फिर रहे है आज….

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होश में रह के बे हवास फिर रहे है आजतेरे नगर में हम उदास फिर रहे है आज,

कहे दुनियाँ उसे ऐसे ही बेकार न आये…

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कहे दुनियाँ उसे ऐसे ही बेकार न आयेक़िस्मत का मेरी बन के ख़रीदार न आये, इस बार मुलाक़ात

कर के सारी हदों को पार चला….

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कर के सारी हदों को पार चलाआज फिर से मैं कु ए यार चला, उसने वायदा किया था

रुख से नक़ाब उनके जो हटती चली गई…

रुख से नक़ाब उनके

रुख से नक़ाब उनके जो हटती चली गईचादर सी एक नूर की बिछती चली गई, आये वो मेरे

हर नाला तिरे दर्द से अब और ही कुछ है….

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हर नाला तिरे दर्द से अब और ही कुछ हैहर नग़्मा सर-ए-बज़्म-ए-तरब और ही कुछ है, अरबाब-ए-वफ़ा जान