ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है…
ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है कुछ खोया तो कुछ पाया ज़रूर है, एक तुम हो जो दर्द
Love Poetry
ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है कुछ खोया तो कुछ पाया ज़रूर है, एक तुम हो जो दर्द
लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है अपने सुख़न को अपनी पहचान कर लिया है, आख़िर
इस दिल में आह, आँखों में नाले है हमें न सताओ हम तुम्हारे चाहने वाले है, मुहब्बत भरे
चलो अब यूँ भी आज़माए कभी तुम कह दो तो भूल जाए कभी, ज़िस्म मुर्दा हुआ तो ये
बीच सफ़र में छोड़ गया हमसफ़र हमसफ़र ना रहा इतना दर्द दिया हमदर्द ने कि हमदर्द हमदर्द ना
अगर तू साथ चल पड़ता सफ़र आसान हो जाता ख़ुशी से उम्र भर जीने का एक सामान हो
हिज्र की शब घड़ी घड़ी दिल से यही सवाल है जिसके ख़याल में हूँ गुम उसको भी कुछ
अब अपने दीदा ओ दिल का भी ए’तिबार नहीं उसी को प्यार किया जिस के दिल में प्यार
ये दिल आवेज़ी ए हयात न हो अगर आहंग ए हादसात न हो, तेरी नाराज़गी क़ुबूल मगर ये
आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के रहना आ गया और वो ये समझे कि मुझ को