जताए हक़ न कैसे हम भला इक़रार पे…

जताए हक़ न कैसे

जताए हक़ न कैसे हम भला इक़रार पे उनके हमें फिर भी नाज़ होता है हसीं इंकार पे

इतना एहसान तो हम पर वो ख़ुदारा करते

itna ehsan to ham par

इतना एहसान तो हम पर वो ख़ुदारा करते अपने हाथों से जिगर चाक हमारा करते, हमको तो दर्द

जिसने भी मुहब्बत का गीत गया है

जिसने भी मुहब्बत का

जिसने भी मुहब्बत का गीत गया है ज़िन्दगी का लुत्फ़ उसने ही उठाया है, मौसम गर्मी का हो

अब मुहब्बत का इरादा बदल जाना भी…

अब मुहब्बत का इरादा

अब मुहब्बत का इरादा बदल जाना भी मुश्किल है उन्हें खोना भी मुश्किल,उन्हें पाना भी मुश्किल है, ज़रा

गर्मी ए हसरत ए नाकाम से जल जाते हैं

garmi e hasrat e naqam

गर्मी ए हसरत ए नाकाम से जल जाते हैं हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं,

गरेबाँ दर गरेबाँ नुक्ता आराई भी होती है

gareban dar gareban nuqta

गरेबाँ दर गरेबाँ नुक्ता आराई भी होती है बहार आए तो दीवानों की रुस्वाई भी होती है, हम

इस नहीं का कोई इलाज नहीं

Bazmeshayari_512X512

इस नहीं का कोई इलाज नहीं रोज़ कहते हैं आप आज नहीं, कल जो था आज वो मिज़ाज

गँवाई किस की तमन्ना में ज़िन्दगी मैं ने

गँवाई किस की तमन्ना

गँवाई किस की तमन्ना में ज़िन्दगी मैं ने वो कौन है जिसे देखा नहीं कभी मैं ने, तेरा

अज़ाब ए हिज़्र बढ़ा लूँ अगर इजाज़त हो

अज़ाब ए हिज़्र बढ़ा

अज़ाब ए हिज़्र बढ़ा लूँ अगर इजाज़त हो एक और ज़ख्म खा लूँ अगर इजाज़त हो, तुम्हारे आरिज़

एक जाम खनकता जाम कि साक़ी…

एक जाम खनकता जाम

एक जाम खनकता जाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है एक होश रुबा इनआ’म कि साक़ी रात गुज़रने