मुहब्बत कहाँ अब घरों में मिले…

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मुहब्बत कहाँ अब घरों में मिले यहाँ फूल भी पत्थरो में मिले, जो फिरते रहे दनदनाते हुए वही

चंद सिक्को के एवज़ हर ज़ुर्म के सबूत मिटाने वालो…

चंद सिक्को के एवज़

चंद सिक्को के एवज़ हर ज़ुर्म के सबूत मिटाने वालो इक्तिदार के नशे में धूत, लोगो पे ज़ुल्म

सुनो ! दौर ए बेहिस में जब कमाली हार जाता है…

सुनो दौर ए बेहिस

सुनो ! दौर ए बेहिस में जब कमाली हार जाता है हरामी जीत जाते है हलाली हार जाता

एक ज़ालिम उसपे क़हर आँखे दिखा रहा है…

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एक तो ज़ालिम उसपे क़हर आँखे दिखा रहा है अंज़ाम ए बेहया शायद अब नज़दीक आ रहा है,

गम ए वफ़ा को पस ए पुश्त डालना होगा…

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गम ए वफ़ा को पस ए पुश्त डालना होगा खटक रहा है जो काँटा निकालना होगा, फ़कीर ए

गुलाब चाँदनी रातों पे वार आये हम…

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गुलाब चाँदनी रातों पे वार आये हम तुम्हारे होंठों का सदका उतार आये हम, वो एक झील थी

हुई न खत्म तेरी रह गुज़ार क्या करते…

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हुई न खत्म तेरी रह गुज़ार क्या करते तेरे हिसार से ख़ुद को फ़रार क्या करते ? सफ़ीना

अल्लाह अगर तौफ़ीक़ न दे इन्सान के बस का काम नहीं…

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अल्लाह अगर तौफ़ीक़ न दे इन्सान के बस का काम नहीं फ़ैज़ान ए मोहब्बत आम सही, इर्फ़ान ए

बड़ी क़दीम रिवायत है ये सताने की…

बड़ी क़दीम रिवायत है

बड़ी क़दीम रिवायत है ये सताने की करो कुछ और ही तदबीर आज़माने की, कभी तो फूट कर

जिसे तुम प्यार समझे थे वो कारोबार था हमदम…

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जिसे तुम प्यार समझे थे वो कारोबार था हमदम यहाँ सब अपने मतलब में मुहब्बत साथ रखते है,