गम ए वफ़ा को पस ए पुश्त डालना होगा
खटक रहा है जो काँटा निकालना होगा,
फ़कीर ए इश्क़ हूँ कुछ दे के टालना होगा
बस एक निगाह का सिक्का उछालना होगा,
सवाल दोस्तों अज़मत का है सरो का नहीं
हमें वक़ार का परचम संभालना होगा,
गज़ब की प्यास लगी सामना सराब का है
सो रेग ए सहरा से पानी निकालना होगा,
उसे बताओ कि फाका है आज अपना भी
मगर फ़कीर को इज्ज़त से टालना होगा,
ये इंतज़ार सलामत रहे वो आएगा
मगर है शर्त कि दिल को संभालना होगा,
तुम्हारे दिल की ज़मी जल चुकी मगर हमदम
इसी से नख्ल ए मुहब्बत निकालना होगा..!!
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