ज़िस्म क्या है ? रूह तक सब कुछ….

zism kya hai ruh tak sab kuch khulasa dekhiye

ज़िस्म क्या है ? रूह तक सब कुछ ख़ुलासा देखिए आप भी इस भीड़ में घुस कर तमाशा

अँधेरा सफ़र है ख़बरदार रहना…

andhera safar hai khabardar

अँधेरा सफ़र है ख़बरदार रहना लुटेरा शहर है ख़बरदार रहना, गला काटतें है बड़ी सादगी से ये इनका

घर में ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है

ghar me thande chulhe

घर में ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है बताओ कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है

उनका दावा, मुफ़लिसी का मोर्चा…

unka daava muflisi ka

उनका दावा, मुफ़लिसी का मोर्चा सर हो गया पर हकीक़त ये है मौसम और बदतर हो गया, बंद

शाम को जिस वक़्त ख़ाली हाथ घर…

शाम को जिस वक़्त

शाम को जिस वक़्त ख़ाली हाथ घर जाता हूँ मैं मुस्कुरा देते है बच्चे और मर जाता हूँ

कुछ अधूरी हसरतें अश्क ए रवाँ में…

kuch-adhuri-hasraten

कुछ अधूरी हसरतें अश्क ए रवाँ में बह गए क्या कहें इस दिल की हालत, शिद्दत ए गम

ज़माना आया है बेहिजाबी का आम…

zamana-aaya-hai-behizabi

ज़माना आया है बेहिजाबी का आम दीदार ए यार होगा सुकूत था पर्दादार जिसका वो राज़ अब आश्कार

जाने किस करनी का फल होगा…

जाने किस करनी का फल

जाने किस करनी का फल होगा कैसी फिजा, कैसे मौसम में जागे हम ? शहरों से सेहराओ तक

ना मस्ज़िदे ना शिवाले तलाश करते है…

naa-maszide-naa-shiwale

ना मस्ज़िदे ना शिवाले तलाश करते है ये भूखे पेट निवाले तलाश करते है, हमारी सादा दिली देखो

किस ओर ये सफ़र है, संभल जाइए…

किस ओर ये सफ़र है

किस ओर ये सफ़र है, संभल जाइए कौन कब किस डगर है, संभल जाइए, नेक रस्ते पे चलते