दोस्त क्या ख़ूब वफ़ा का सिला देते है…

हैरतों के सिलसिले सोज़

दोस्त क्या ख़ूब वफ़ा का सिला देते है हर नये मोड़ पर एक ज़ख्म नया देते है, तुमसे

निहत्थे आदमी के हाथ में हिम्मत ही काफी है…

nihatthe aadmi ke hath me himmat hi kaafi hai

निहत्थे आदमी के हाथ में हिम्मत ही काफी है हवा का रुख बदलने के लिए चाहत ही काफी

हो मुबारक़ तुम्हे तुम्हारी उड़ान पिंजरे में…

ho mubaraq tumhe tumhari udaan pinjre me

हो मुबारक़ तुम्हे तुम्हारी उड़ान पिंजरे में अता हुए है तुम्हे दो जहाँ पिंजरे में, है सैरगाह भी

फ़साना अब कोई अंजाम पाना चाहता है…

fasana ab koi anzam pana chahta hai

फ़साना अब कोई अंजाम पाना चाहता है तअल्लुक़ टूटने को एक बहाना चाहता है, जहाँ एक शख़्स भी

बारिश के क़तरे के दुख से ना वाक़िफ़ हो…

barish ke qatre ke dukh se na waqif ho

बारिश के क़तरे के दुख से ना वाक़िफ़ हो तुम हँसते चेहरे के दुख से ना वाक़िफ़ हो,

सज़दे के सिवा सर को झुकाना नहीं आता…

hamne suna tha farishte jaan lete hai

रूठे हुए लोगो को मनाना नहीं आता सज़दे के सिवा सर को झुकाना नहीं आता, पत्थर तो चलाना

सावन को ज़रा खुल के बरसने की दुआ दो…

savan ko zara khul ke barasne ki dua do

सावन को ज़रा खुल के बरसने की दुआ दो हर फूल को गुलशन में महकने की दुआ दो,

आज जो तुम्हारी नज़र में एक तवायफ़ सी है वो…

आज जो तुम्हारी नज़र में एक तवायफ़ सी है वो तुम्हारी ही तो बनाई हुई बेअदब रिवायत सी

हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए…

har qadam kahta hai tu aya hai jaane ke liye

हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए मंज़िल ए हस्ती नहीं है दिल लगाने के

ख़राब लोगो से भी रस्म ओ राह रखते थे…

kharab logo se bhi rasm o raah rakhte the

ख़राब लोगो से भी रस्म ओ राह रखते थे पुराने लोग गज़ब की निगाह रखते थे, ये और