क़ुबूल है अब तो ज़िन्दगी का हर तोहफ़ा

क़ुबूल है अब तो

क़ुबूल है अब तो ज़िन्दगी का हर तोहफ़ा मैंने ख्वाहिशो का नाम बताना छोड़ दिया, जो दिल के

जुबां कड़वी, हलक सूखा, हैं साँसे मुनज़मिद मेरी

zuban kadwi halak sukha hai saanse munzamid

जुबां कड़वी, हलक सूखा, हैं साँसे मुनज़मिद मेरी ज़हर ने किया क्या आख़िर ज़रा सी चासनी दे कर,

अज़ब क़ातिब है इन्साँ में फ़रावानी नहीं भरता

अज़ब क़ातिब है इन्साँ

अज़ब क़ातिब है इन्साँ में फ़रावानी नहीं भरता दगाबाज़ी तो भरता है वफ़ादारी नहीं भरता, भरोसा था तभी

गम ए तन्हाई में राहत ए दिल का सबब है

गम ए तन्हाई में

गम ए तन्हाई में राहत ए दिल का सबब है एक ये चंचल सी हवा और अँधेरी रात,

सहराओं से आने वाली हवाओं में रेत है

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सहराओं से आने वाली हवाओं में रेत है हिज़रत करूँगा गाँव से गाँवो में रेत है, ऐ कैस

ये एक बात समझने में रात हो गई है

ये एक बात समझने

ये एक बात समझने में रात हो गई है मैं उससे जीत गया हूँ कि मात हो गई

यहाँ किसे ख़बर है कि ये उम्र बस

यहाँ किसे ख़बर है

यहाँ किसे ख़बर है कि ये उम्र बस इसी पे गौर करने में कट रही है, कि ये

वो जो दिख रहा है सच हो ये ज़रूरी तो नहीं है

वो जो दिख रहा

वो जो दिख रहा है सच हो ये ज़रूरी तो नहीं है वो जो तुम कहते हो हक़

संगदिल कहाँ किसी का गमगुसार करते है

sangdil kahan kisi ka

संगदिल कहाँ किसी का गमगुसार करते है ये मुर्दा ज़मीर कब मज़लूमो से प्यार करते है, ना फ़िक्र

जो पूछती हो तो सुनो ! कैसे बसर होती है

जो पूछती हो तो

जो पूछती हो तो सुनो ! कैसे बसर होती है रात खैरात की, सदके की सहर होती है,