ये मिस्रा नहीं है वज़ीफ़ा मिरा है…

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ये मिस्रा नहीं है वज़ीफ़ा मिरा हैख़ुदा है मोहब्बत मोहब्बत ख़ुदा है, कहूँ किस तरह मैं कि वो

वो सिवा याद आए भुलाने के बा’द…

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वो सिवा याद आए भुलाने के बा’दज़िंदगी बढ़ गई ज़हर खाने के बा’द, दिल सुलगता रहा आशियाने के

वो हमें जिस क़दर आज़माते रहे…

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वो हमें जिस क़दर आज़माते रहेअपनी ही मुश्किलों को बढ़ाते रहे, वो अकेले में भी जो लजाते रहेहो

ज़िन्दगी खाक़ न थी बस खाक़ उड़ाते गुज़री…

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ज़िन्दगी खाक़ न थी बस खाक़ उड़ाते गुज़रीतुझसे क्या कहते, तेरे पास जो आते गुज़री, दिन जो गुज़रा

गुरेज़ कर के मुसाफ़िर कोई गुज़र भी गया…

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गुरेज़ कर के मुसाफ़िर कोई गुज़र भी गयान जाने कैसे मेरी रूह में उतर भी गया, ये ज़ख्म

ज़रा सी देर ठहर कर सवाल करते है…

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ज़रा सी देर ठहर कर सवाल करते हैसफ़र से आये हुओ का ख्याल करते है, मैं जानता हूँ

महफिले लूट गई जज़्बात ने दम तोड़ दिया…

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महफिले लूट गई जज़्बात ने दम तोड़ दियासाज़ ख़ामोश है नगमात ने दम तोड़ दिया, अनगिनत महफिले महरूम

दिल मेरा मिस्र का बाज़ार भी हो सकता है…

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दिल मेरा मिस्र का बाज़ार भी हो सकता हैकोई धड़कन का ख़रीदार भी हो सकता है, कोई हो

नख्ल ए ममनूअ के रुख दोबारा गया

नख्ल ए ममनूअ के

नख्ल ए ममनूअ के रुख दोबारा गया, मैं तो मारा गयाअर्श से फ़र्श पर क्यूँ उतारा गया ?

उस ने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दिया..

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उस ने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दियाहिज्र की रात बाम पर माह-ए-तमाम रख दिया, आमद-ए-दोस्त की