पहले जो ख़ुद माँ के आंचल में छुप जाया करती थी
आज वो ख़ुद किसी को आंचल में छुपाया करती है,
पहले जो ऊँगली पे गरम लगने से घर को सर पे उठाया करती थी
आज पूरा हाथ जल जाने पर भी खाना बनाया करती है,
पहले जो छोटी छोटी बातों पे रूठ जाया करती थी
आज वो बड़ी बड़ी बातों को भी ज़हन में छुपाया करती है,
माँ माँ कहते हुए जो सारा दिन हो पूरे घर में खेला करती थी
आज वो लफ्ज़ ए माँ सुन कर धीरे से मुस्कुराया करती है,
जिसका दस बजे उठने पर भी जल्दी उठ जाना होता था
आज वो सात बजे उठने पर भी लेट हो जाया करती है,
सारा दिन फ़ारिग रह कर भी ख़ुद को बिजी बताया करती थी
आज पूरे दिन काम कर के भी काम चोर कहलाया करती है,
ना जाने कब वो किसी माँ के बेटी, किसी की माँ बन गई
ना जाने कब एक बेटी माँ के सफ़र में तब्दील हो गई..!!
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